सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

*सड़कों पर गढ्ढे होने से आये दिन हो रहे हादसे, जिम्मेदार अंजान*

 *सड़कों पर गढ्ढे होने से आये दिन हो रहे हादसे, जिम्मेदार अंजान*


ढीमरखेड़ा  - उमरियापान की सड़कों पर जानलेवा गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हें। यहाँ तीनों दिशाओं में जाने वाली सड़कों पर कही न कही गड्ढे हैं।कहीं सीवरेज के गड्ढे ऊपर तो कहीं सड़कों से नीचे दिखाई देते हैं।जिससे कभी भी हादसे होते हैं।उमरियापान से ढीमरखेड़ा मार्ग पर नीचे तरफ तीन बड़े और गहरे गढ्ढे हैं। यहाँ से 24 घंटों आवागमन जारी रहता। बड़े वाहन आने पर दो -चार पहिया वाहन चालकों को परेशानी होती हैं। गढ्ढे में पानी भरा होने से कई बार दो पहिया वाहन चालक गढ्ढे में घुसकर चोटिल हो जाते है। लोगों का पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और एमपीआरडीसी के अधिकारियों को इस ओर अवगत कराया। लेकिन सड़क पर गढ्ढे बढ़ते जा रहे हैं। जिससे यहाँ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसा नहीं कि इस मार्ग से अधिकारियों का आवागमन नही होता हो,फिर भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नही दे रहे है। 

*उमरियापान से कटनी मार्ग की स्थिति खराब*

इसी प्रकार उमरियापान से कटनी मार्ग पर भी कई जगह गढ्ढे हैं। सिहोरा मार्ग की स्थिति तो सबसे ज्यादा खराब है। इस मार्ग पर गढ्ढे होने के साथ साथ सड़क भी उखड़ गई है। उबड़ खाबड़ सड़क होने से लोगों को आवागमन करने में परेशानी होती है। यहाँ लोक निर्माण विभाग के द्वारा कार्य कराया जाना है, लेकिन सड़क का काम तो दूर गढ्ढे भी नहीं भरे जा रहे हैं।

*उमरियापान से सिहोरा रोड क्षतिग्रस्त, लगातार हो रही दुर्घटना*

 उमरियापान से सिहोरा रोड के हाल - बेहाल हैं जगह - जगह गड्ढे बने हुए हैं। यह सड़क पीडब्ल्यूडी विभाग के अंतर्गत आती हैं आवागमन में राहगीरों को भारी मुश्किल होती है। क्षेत्र में खस्ताहाल सड़क के चलते लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पीडब्ल्यूडी, एमपीआरडीसी विभाग के द्वारा बनाई गई सड़क खस्ताहाल हो गई है। इन पर वाहन चालकों से लेकर यात्रियों को सफर करना दुश्वार हा़े गया है। मानसून से पूर्व कुछ सड़कों की मरम्मत करवाई थी लेकिन हकीकत यह है कि सड़कों की जगह गिट्टी रेत बची है। जगह-जगह सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। वही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी अपना ध्यान आकर्षित करना चाहिए ताकि जनप्रतिनिधि उच्च अधिकारियों तक आवाज उठा सके जिससे जल्द से जल्द सड़क का निर्माण हों सके और आवागमन में दिक्कत ना हो सके।

*इनका कहना है*

कुछ जगहों पर गड्ढे होने की जानकारी प्राप्त हुई हैं, जल्द ही गड्ढों को भरने का कार्य कराया जाएगा। ताकि ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कतें न आये।

*एमपीआरडीसी एसडीओ राजेश सक्सेना*


टिप्पणियाँ

popular post

शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द

 शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा को अंतिम विदाई, गमगीन माहौल में उमड़ा जनसैलाब, हर आँख नम, ज्ञान का दीप बुझा, शिक्षक अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम संस्कार में फूटा जनसैलाब, शिक्षा जगत का अनमोल रत्न हुआ पंचतत्व में विलीन, अवनीश कांत मिश्रा को नम आँखों से विदाई, गुरु को अंतिम प्रणाम, अवनीश कांत मिश्रा के अंतिम दर्शन को उमड़ा पूरा क्षेत्र, जिसने सिखाया जीना, आज उसी को रोते हुए दी अंतिम विदाई, शिक्षक नहीं, संस्कार थे अवनीश कांत मिश्रा अंतिम संस्कार में छलका जनसमुदाय का दर्द ढीमरखेड़ा |  ग्राम झिन्ना पिपरिया के प्रतिष्ठित कोपारिहा परिवार में जन्मे, जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक श्री अवनीश कांत मिश्रा का निधन क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वे श्री सीताराम जी मिश्रा के बड़े सुपुत्र थे और अपने सरल स्वभाव, कर्मठता व सेवा भावना के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। श्री मिश्रा बचपन से ही मेधावी रहे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए ट्रिपल एम.ए. तक की पढ़ाई पूर्ण की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण का परिचय वर्ष 1994-95 में देखने को मिला,...

प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग

 प्राचार्य की पोस्ट ने पार की सारी हदें, हाईकोर्ट और ब्राह्मण समाज पर टिप्पणी से भड़का जनाक्रोश, सड़क से सोशल मीडिया तक विरोध, कॉलेज प्राचार्य ने हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज पर की अभद्र टिप्पणी, जांच के आदेश सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, निलंबन और एफआईआर की मांग कटनी ।  ढीमरखेड़ा स्थित शासकीय महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य बृजलाल अहिरवार एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर माननीय हाई कोर्ट और ब्राह्मण समाज के खिलाफ अभद्र, अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद मामला प्रशासन और पुलिस तक पहुंच गया है। गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। *सोशल मीडिया पोस्ट से भड़का विवाद* जानकारी के अनुसार, प्रभारी प्राचार्य ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें कथित तौर पर हाई कोर्ट के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वहीं ब्राह्मण समाज को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। पोस्ट के सामने आते ही क्षेत्र में नाराजगी फैल गई और सामाजिक संगठनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया। *जनसुनवाई में पहुंची शिकायत* ...

सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत

 सिकमी नामा पोर्टल फेल होने से बड़वारा विधानसभा के किसान संकट में, विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र, योगेंद्र सिंह दादा ठाकुर ने मीडिया को कराया अवगत  कटनी  |  कटनी जिले की बड़वारा विधानसभा के किसानों के सामने इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। खेती-किसानी पर निर्भर हजारों किसान इस समय गहरी चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।कारण है सिकमी नामा से जुड़े किसानों का पंजीयन पोर्टल पर फेल हो जाना, जिसके चलते वे समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। यह समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे किसानों की आजीविका से जुड़ी हुई है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर क्षेत्रीय विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर बड़वारा विधानसभा के किसानों की पीड़ा से अवगत कराया है।विधायक ने पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सिकमी नामा पर खेती करने वाले किसानों का पंजीयन पोर्टल में अस्वीकार हो रहा है, जिसके कारण वे सरकारी खरीदी केंद्रों पर अपनी उपज नहीं बेच पा रहे हैं। बड़वारा विधान...